चीनी की कीमतों को
काबू में करने के लिए सरकार
की ओर से चीनी
सेक्टर पर लगाई गई
पाबंदियों की वजह से
जो समस्याएं पैदा हो रही हैं
उनकी समीक्षा के लिए कमेटी
का गठन किया जाएगा। बुधवार को महाराष्ट्र के
चीनी सेक्टर को लेकर पूर्व
कृषि मंत्री शरद पवार की अध्यक्षता में
एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय वित्तमंत्री
अरुण जेटली के साथ मुलाकात
की है चीनी सेक्टर
को लेकर अपनी मांगें रखीं।
प्रतिनिधिमंडल सरकार से महाराष्ट्र के चीनी सेक्टर के लिए स्पेशल पैकेज चीनी आयात की इजाजत नहीं देने की मांग कर रहा है। एनसीपी नेता दिलीप वालसे पाटिल के मुताबिक चीनी उद्योग 2016-17 के दौरान 235 लाख टन चीनी का उत्पादन मान रहा है, पिछला स्टॉक करीब 71 लाख टन है और 2016-17 की खपत करीब 260 लाख टन रहने वाली है। ऐसे में अगले सीजन 2017-18 के लिए 45 लाख टन चीनी का स्टॉक बचा रहेगा जो दो महीने की जरूरत को पूरा करने के लिए काफी होगा। ऐसे में सरकार को न तो चीनी आयात करने की जरूरत है और न ही निर्यात करने की।
केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए हाल ही में चीनी मिलों पर स्टॉक लिमिट लगाने का फैसला किया है जिसके तहत चीनी मिलें कुल उत्पादन का 37 फीसदी से ज्यादा स्टॉक अपने पास नहीं रख सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक महाराष्ट्र की चीनी मिलों के पास भारी मात्रा में स्टॉक पड़ा हुआ है और स्टॉक लिमिट लगने के बाद उन मिलों पर स्टॉक निकालने का दबाव बढ़ रहा है जिससे भाव में गिरावट की आशंका है।






