तेल विपणन वर्ष 2015-16 (अक्टूबर-सितंबर) में सोया खली और इससे बने उत्पादों का भारतीय निर्यात करीब 65 प्रतिशत गिरकर 2.62 लाख टन रह गया। पिछले तेल विपणन वर्ष में देश से इन उत्पादों का निर्यात 7.51 लाख टन के स्तर पर रहा था। प्रसंस्करणकर्ताओं के इंदौर स्थित संगठन सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) की ओर से आज जारी विज्ञप्ति में यह जानकारी दी गई है।
मौजूदा वित्तीय वर्ष में अप्रैल से सितंबर के बीच देश से सोयाखली और इससे बने उत्पादों के निर्यात का आंकड़ा 76,000 टन रहा। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इन पदार्थों के 2,02,000 टन के निर्यात से 62.38 प्रतिशत कम है। जानकारों ने बताया कि अमेरिका,ब्राजील और अर्जेेन्टीना जैसे देशों की सोया खली के भाव लम्बे समय से भारतीय सोया खली के मुकाबले काफी कम बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोया खली की मांग गिरने की सबसे बड़ी वजह यही है।
सोया खली वह उत्पाद है, जो सोयाबीन का तेल निकाल लेने के बाद बचा रह जाता है। यह उत्पाद प्रोटीन का बड़ा स्त्रोत है। इससे सोया आटा और सोया बड़ी जैसे खाद्य उत्पादों के साथ पशु आहार और मुर्गियों का दाना भी तैयार किया जाता है।





