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Thursday, November 10, 2016

आयकर विभाग की नज़र जीरो बैलेंस वालो पर भी जरा बचकर रहना





जी हां, 500 और 1000 रुपए के नोटों के बैन होने के बाद उन लोगों ने उन लोगों को तलाशना शुरु कर दिया जिनके पास बैंक एकाउंट तो है मगर उनके बैंक एकाउंट में पैसा नहीं या फिर एक लंबे अरसे से ये बैंक एकाउंट प्रयोग में ही नहीं लाए गए। लेकिन सभी को एक बात यहां गौर करनी होगी। अब सबकुछ ऑटो सिस्टम और फिल्टर मोड पर है। यानि आप कम्प्यूटर को निर्देश दे कर किसी भी व्यक्ति की पूरी जानकारी सैकेण्डों में निकलवा सकते हैं। 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक बैंकों में होने वाली हर कैश डिपॉज़िट पर अब इनकैम टैक्स की पैनी नजर होगी।



नोटिस सेक्शन 142 (1) अगर आप अपनी आय सिद्ध नहीं कर पाए तो अगर सेक्शन 148 का नोटिस मिलता है तो आयकर विभाग की 153ए के तहत रेड यही नहीं सबसे खास बात, उस कैश डिपॉज़िट के बाद किस एकाउंट में पैसा ट्रांसफर हो रहा है पर भी इनकैम टैक्स अपनी पैनी निगाहें गढ़ाए बैठा है। इसलिए अगर काले का सफेद करने जा रहे हैं तो जरा इन पेचिदगियों को समझना जरुरी है और अगर आप काले का किसी के लिए सफेद करने जा रहे हैं तब भी इन्हें पढ़ना एक बार आपके लिए जरुरी हो जाता है। इसके हम केस स्टेडी के तौर पर समझने की कोशिश करते हैं। 



केस स्टेडी


मान लीजिए एक व्यक्ति के पास 500 और 1000 रुपए के वो नोट हैं जिनका उसके पास कोई हिसाब नहीं। यानि कैश है ब्लैक मनी के तौर पर। अब अगर वो अपना पैसा बैंक में जमा करने जाता है तो बैंक एकाउंट के साथ उसका पैन नम्बर पहले से ही एटैच है। और सालाना वो कितने रुपए से अपनी रिटर्न यानि सरकार को अपनी कमाई का हिसाब दे रहा है भी उसी पैन नम्बर पर ही डिक्लेयर किया हुआ है। तो कैश डिपॉजिट होने के बाद आपके पास इनैकम टैक्स से नोटिस रिसिव हो सकता हैं।


नोटिस सेक्शन 142 (1) :


इस नोटिस के मुताबिक 15 दिनों में आपको अपनी रिटर्न फाइल करनी होगी। इसके बाद आयकर विभाग का एसेसिंग ऑफिसर आपके खातों की और आपकी कमाई के लेन-देन के ब्योरों की जांच करेगा। यहां भले ही इस कैश की आप जानकारी देने में सफल हों लेकिन एसेसिंग ऑफिसर को ये अधिकार है कि वो आपके बीते 3 साल के पर्सनल खाते और आपके कारोबारी लेन-देन की सारी जानकारी आपसे मांग सकता है और उसकी सत्यता की जांच का अधिकार भी उसी के पास है। अमूमन ये नोटिस 144, 148 और 153ए के साथ आप को मिल सकता है। 


अगर आप अपनी आय सिद्ध नहीं कर पाए तो -


अब अगर आप नोटिस 142 ;1द्ध के तहत अपनी आय सिद्ध नहीं कर पाए और अगर आपसे आयकर विभाग का एसेसिंग ऑफिसर संतुष्ट नहीं होता तब 144 के तहत आयकर विभाग का ये अधिकारी अपनी समझ से जो उसे उचित लगे आप पर जुर्माना लगा सकता है और अब आप पर फौजदारी का मुकदमा भी चला सकता है। और अगर 144 की पालना आपके द्वारा नहीं की जाती है तो प्रतिदिन कम से कम 4 रुपए और अधिक से अधिक 10 रुपए प्रतिदिन का जुर्माना साथ जुड़ता जाएगा और एक साल तक की सजा का प्रावधान भी है। इसके साथ रुपए 10000 का जुर्माना अलग से लगाया जा सकता है। 


अगर सेक्शन 148 का नोटिस मिलता है तो


हो सकता है कैश जमा करवाने वाले को सेक्शन 148 के तहत नोटिस मिले। ये नोटिस 197 के साथ जुड़कर आता है। इस नोटिस में आयकर अधिकारी बीते 6 साल के एकाउंट को चैक करने का अधिकार रखता है। इसके साथ वो उन दस्तावेजों की मांग कर सकता है जो उसे लगता है कि आपकी आय को सत्यापित करने के लिए जरुरी हैं। हो सकता है वो दस्तावेज आपकी नजर में कोई मायने नहीं रखते लेकिन अधिकारी ऐसे दस्तावेजों की मांग भी कर सकता है जो आप सोच भी नहीं सकते। 


आयकर विभाग की 153के तहत रेड


अगर आपकी ट्रांजेक्शन को देखते हुए आयकर विभाग के अधिकारी 153ए के तहत कार्यवाही कर सकते हैं और एक दस्ता बना कर आपके कार्यालय, घर और आपके नीजि संबंधियों के धरों में छापामारी यानि रेड कर सकते हैं।


स्कूटनी में आने की संभावना


ऐसे खाते जिन में पूरे साल में कुल इतना कैश डिपॉजिट नहीं हुआ अचानक एक साथ कैश आने पर आपको 143 (2) का नोटिस भी मिल सकता है। यानि आपका नाम स्कूटनी में आ सकता है।












इंडियन मार्किट व्यू