सरकार ने कहा कि नियति में गिरावट मई माह में रोकी जा चुकी है और अब समय है कि नियति को प्रोत्साहन दिया जाए । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मल सीतारमण ने कहा कि अभी नियति में तीव्र वृद्धि धीमी रहने की संभावना है यर यह गर्त से उठने बागा है । उन्होंने कहा, मुझें लगता है कि अब से इसमें धीमी लेकिन निरंतर वृद्धि दिखेगी ।
'पिछले महीने के संकेतकाँ सं स्पष्ट हैं कि यह नियति में 'गिरावट 0. 79 फीसदी तक संगैमित रह गइ हैं । पर अब भी ऐसी स्थिति हे. जिसर्मं हर्मं नियति में गति लाने के लिए बहुत कुछ करना है । उन्होंने कहा यह ऐसा समय है जबकि मदद करनी होगी चाहे वह व्याज सहायता के तौर पर हो या फिर नियति पर किसी अन्य तरह के प्रोत्साहन के रूप में । हम खंडवार तरीके से इस पर विचार कर रहे हैं 1 वाणिज्य मंजी की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है क्योकि नियति मई महीने में लगातार 1 8वें महीने गिरा हालांकि यह 0 79 फीसढीकी गिरावट मपुती रह गई । मई में नियति 22 . 1 7 अरब डॉलर रहा । इंजीनियरिग और रत्न एवं जेवरात जैसे बाई गैर तेल खंडों में नियति बहा है। दिसंबर 20, 4 से अब तक मई महीने में नियति में सबसे कम गिरावट हुई । सीतारमष्ठा ने कहा कि वह सतर्क है रोजिन मैं देख रही हूँ कि नियति में निरावट को थामा रना चुका है और यह धीरे; धीरे सुधर रही है । यह पूछने पर कि क्या सरकार इस्मात पर न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईंपी) की मियाद और बहाने पर विचार कर रही है. उन्होंने कहा कि मंत्रालय समय जाने पर इस मुद्दे पर बात कोमा । यह व्यवस्था अभी अगस्त के शुरू तक के लिए लागू है । एक अधिकारी के मुताबिक एमजाईयी विश्व व्यत्मार संगठन (डब्लूटीओ) के अनुकूल पहल नहीं है । भारत को डंपिंग रोधी शुल्क जैसी पहलों पर विचार करना चाहिए जो डक्यूटीओ के अनुरूप है ताकि इस्पात समेत जिंसों के सस्ते आयात से निपटा जा सके ।
सोर्स :- Markettimes






